Posts

Showing posts with the label Hindi

मेरा देश बदल रहा है

माँ लक्ष्मी के दर्शन हुए। साक्षात गुलाबी रंग में। लगभग ७० मिनट सपत्नी कतार में प्रतीक्षा के बाद। अनुभूति ऐसी कि मानो क्या पा लिया हो, एक अनूठी उपलव्धि की तरह। मेरी स्मरण शक्ति ने मुझसे कुछ कहा, पिछली बार कब इस प्रकार कतार में खडे हुए थे। उत्तर मिला, माँ कामख्या देवी के दर्शन के समय, लगभग दो, ढाई वर्ष पूर्व। वह भी अविस्मरनीय अनुभव था, क्योंकि दशमी का दिन था, किसी प्रकार का प्रवेश शुल्क नहीं था और विशेषतः कोई वीआईपी दर्शन की कतार अलग नहीं थी। सभी को लाइन में खड़े होना था। कभी कभी भगवान के मंदिर में भी दर्शन हेतु समानता का भाव देखकर अच्छा लगता है। साल में कुछ दिन के लिए ही सही, कम से कम इतनी संवेदना अभी जीवित तो है। अर्थशास्त्र व राजनीतिशास्त्र की घनिष्ठता जग जाहिर रही है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लेकर ऐडम स्मिथ के अर्थशास्त्र तक राजा, प्रजा, व नीति के परिप्रेक्ष में अर्थ की महत्वा हमेशा केन्द्र-बिंदु रही है। शासक, शासन व शोषण नीतिशास्त्र का अभिन्न अंग रहा है। शासन की क्षमता व्यक्ति विशेष के ज्ञान, पराक्रम व साहस से अधिक धन-बल पर निर्भर रही है। इसी कारण शासक की शक्ति उसके पास संचित लक...

हिंदी दिवस - १४ सितम्बर २०१०

आज के दिन वर्ष १९४९ को भारतीय संविधान ने हिंदी को राज भाषा घोषित किया.  तब से आज तक हम हिंदी को अपनी राष्ट्रभाषा मानते आये हैं.  मुझे अपने हिंदी भाषी होने पर गर्व है क्योंकि यह मेरी राष्ट्रभाषा के साथ साथ मात्रभाषा भी है.  पिछले ६१ वर्षों मे हिंदी ने अपने भिन्न रूप देखे हैं और आज इस बाजारी युग मे भी वह अपनी पहचान बनाने मे काफी सक्षम रही है.  हाँ यह बात अवश्य है कि जिस प्रकार से अंग्रेजी ने अपना मुकाम हमारे व्यवहार मे बनाया है, हिंदी कहीं उससे पीछे खड़ी प्रतीत होती है, यह एक शर्म की बात तो है परन्तु कहीं ना कहीं इसके लिए हिंदी स्वयं या उसके जानने वाले, उसका प्रचार-प्रसार करने वाले, साहित्यकार, आदि जिम्मेदार हैं.  जिस प्रकार से हिंदी के संस्थानों मे राजनीति ने अपनी पैठ बनायीं है उससे यह कह पाना बहुत मुश्किल है कि हिंदी के प्रचार-प्रसार मे लगे यह तथाकथित सरोकारी अपने आशय मे कितने इमानदार रहे हैं या रहेंगे. आज भिन्न विषयों का साहित्य हिंदी भाषा मे उपलब्ध नहीं है, और यदि है भी तो उसका स्तर काफी गिरा हुआ है.  आवयश्कता इस बात की है कि हिंदी मे अधिक से अ...